हिन्दी के सम्मान के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री

हिन्दी के सम्मान के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध - मुख्यमंत्री

मध्यप्रदेश में हिन्दी को प्रोत्साहन की नीति पर अमल
भोपाल । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हिन्दी दिवस पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा है कि राज्य सरकार हिन्दी के सम्मान के लिए लगातार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज “राष्ट्रीय हिन्दी दिवस” पर अपने ट्वीट में कहा कि यह दिवस विशिष्ट और अप्रतिम गर्व का पर्याय है। मातृ भाषा उन्नति का सशक्त आधार है। कोई भी व्यक्ति अपनी भाषा में अपने विचारों को श्रेष्ठ ढंग से अभिव्यक्त कर सकता है। प्रदेश में हिन्दी को प्रोत्साहित किए जाने की नीति है। इस पर गंभीरता पूर्वक अमल किया गया है।
हिन्दी विश्वविद्यालय एक महत्वपूर्ण कदम
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश हिन्दी भाषा बहुल प्रांत है। देश के हिन्दी राज्यों में मध्यप्रदेश ही ऐसा एक मात्र राज्य है जिसने अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना की। वर्ष 2011 में भोपाल में स्थापित इस विश्वविद्यालय का विधिवत शिलान्यास वर्ष 2013 में हुआ। प्रथम शिक्षण सत्र 60 विद्यार्थियों से प्रारंभ हुआ। वर्ष 2017-18 में विद्यार्थी संख्या बढ़कर लगभग 500 हो गई। वर्तमान में यह संख्या 800 से अधिक है। विश्वविद्यालय में अनेक पाठ्यक्रम संचालित हैं। प्रदेश के अनेक नगरों में अध्ययन केंद्र भी संचालित हैं। इस विश्वविद्यालय के माध्यम से विद्यार्थियों में हिन्दी कौशल बढ़ाने का कार्य हुआ है। यहां सभी शिक्षण पद्धतियां और शोध हिन्दी में किए जाते हैं।
प्रदेश में मेडिकल- इंजीनियरिंग की शिक्षा हिन्दी में
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अब मध्यप्रदेश में अंग्रेजी भाषा बच्चों के सपनों की राह में कोई बाधा न बन सके, इसलिए मध्यप्रदेश में मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की व्यवस्था भी हिन्दी में प्रारंभ करने की पहल की गई है।
विश्व हिन्दी सम्मेलन और हिन्दी को प्रोत्साहन
मध्यप्रदेश में 2015 में विदेश मंत्रालय के सहयोग से विश्व हिन्दी सम्मेलन किया गया था। भोपाल के लाल परेड ग्राउंड पर 10वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में अनेक राष्ट्रों के हिन्दी प्रेमी उपस्थित हुए थे। विशेषज्ञ वक्ताओं के व्याख्यान से नागरिक, शिक्षकगण और विद्यार्थी लाभान्वित हुए थे। शासन स्तर पर हिन्दी में कार्य को प्रोत्साहित करने के लिए सदैव प्रयास किए गए हैं। संस्कृति विभाग द्वारा हिन्दी सेवियों को पुरस्कृत और सम्मानित भी किया जाता है। मध्यप्रदेश में स्वाभाविक रूप से हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग की परंपरा है।

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