भाजपा ने नाराज चल रहे पूर्व विधायक भंवर सिंह समेत 5 लीडर्स की कांग्रेस ज्वाइन

भोपाल

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस-बीजेपी में चल रही चुनावी तैयारियों और प्रत्याशियों पर मंथन के बीच नेताओं में उठापटक भी जारी है। एक ओर बीजेपी की जन आशीर्वाद यात्राएं कल से शुरू होने वाली हैं, इसी बीच बीजेपी के कुछ नेता आज कांग्रेस ज्वाइन कर रहे हैं। गौरतलब है कि दोनों पार्टियों में प्रत्याशियों को लेकर मंथन जारी है। बीजेपी 39 प्रत्याशियों की एक सूची जारी कर चुकी है, वहीं कांग्रेस की पहली सूची भी जल्द आने की संभावना है। इस बीच हुए इस घटनाक्रम में राजनीति गरमा गई है।

 भाजपा ने नाराज चल रहे पूर्व विधायक भंवर सिंह शेखावत और कोलारस के विधायक वीरेंद्र रघुवंशी ने आज कांग्रेस का हाथ थाम लिया। इनके साथ ही उत्तर प्रदेश के सांसद रहे सुजान सिंह के बेटे चंद्रभूषण सिंह बुंदेला (गुड्डा राजा) ने मध्य प्रदेश में एंट्री कर कांग्रेस की सदस्तया ली है। इन तीनों को उम्मीद है कि कांग्रेस इन्हें टिकट देगी। इन सभी को प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ, प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कांग्रेस की सदस्यता दिलाई।

भंवर सिंह शेखावत
भंवर सिंह शेखावत दो बार विधायक रहे हैं। वे पहली बार इंदौर-5 सीट से विधानसभा में पहुंचते थे। पार्टी ने 1993 में उन्हें इस सीट से लड़ाया था। इसके बाद 1998 के चुनाव वे हार गए थे। इसके बाद भाजपा ने उन्हें 2013 में धार जिले के बदनावर से चुनाव लड़वाया। वे यहां से विधायक बने, 2018 में उन्हें फिर से टिकट मिला, लेकिन वे कांग्रेस के राजवर्धन सिंह दत्तीगांव से चुनाव हार गए। इसके बाद दत्तीगांव ने ही भाजपा का दामन थाम लिया। अब शेखावत को भाजपा से इस सीट से टिकट मिलने की उम्मीद नहीं थी, इसलिए उन्होंने पार्टी से बगावत करते हुए कांग्रेस का दामन थाम है। वे बदनावर से कांग्रेस उम्मीदवार हो सकते हैं।

वीरेंद्र रघुवंशी
वीरेंद्र रघुवंशी, कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी माने जाते थे। सिंधिया ने उन्हें शिवपुरी उपचुनाव में कांग्रेस से वर्ष 2007 में कांग्रेस टिकट दिलाया था। तब वे पहली बार विधानसभा में पहुंचे थे। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें 2008 और 2013 में भी शिवपुरी से उम्मीदवार बनाया। जिसमें एक बार वे माखन लाल राठौर से चुनाव हारे, दूसरी बार वे यशोधराराजे सिंधिया से चुनाव हारे। इसके बाद उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली। भाजपा ने उन्हें पिछला चुनाव कोलारस सीट से लड़ाया। इसके बाद अब उन्होंने भाजपा से इस्तीफा देकर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। वे शिवपुरी से  विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं।

खुरई से लड़ सकते हैं बुंदेला
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड की राजनीति में बुंदेला परिवार का खासा वर्चस्व रहा है। इस परिवार से सांसद रहे सुजान सिंह के बेटे चंद्रभूषण सिंह बुंदेला ने भी कांग्रेस का दामन थाम लिया है। गुड्डू राजा के नाम से विख्यात चंद्र भूषण सिंह बुंदेला को कांग्रेस खुरई से विधानसभा का चुनाव लड़ा सकती है। यह सीट शिवराज सिंह चौहान कैबिनेट के मंत्री भूपेंद्र सिंह की पारंपरिक है। जिस पर इस बार कांग्रेस बुंदेला को उतार सकती है। दरअसल पिछले चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार बनाए गए अरुणोदय चौबे ने कांग्रेस छोड़ दी है। उसके बाद से इस सीट पर  कांग्रेस किसी मजबूत नेता को खोज रही थी।  

टीकमगढ़ जिला पंचायत सदस्य भी हुए शामिल
बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिला पंचायत के भी सदस्य ने आज कांग्रेस का सदस्यता ली है। जतारा से प्रभुदयाल खटीक और उनकी पत्नी मालती खटीक दोनों ही कांग्रेस में शामिल हुए। इस सीट पर प्रभुदयाल खटीक चुनाव लड़ना चाहते हैं।

गिरिजा शंकर और महेंद्र बौद्ध पर सस्पेंस
इधर भाजपा के पूर्व विधायक गिरिजा शंकर शर्मा ने भी भाजपा छोड़ दी है। वे वर्ष 2003 में इटारसी से विधायक चुने गए थे। इसके बाद वे वर्ष 2008 में होशंगाबाद से विधायक चुने गए थे। इस बार भी वे होशंगाबाद से टिकट चाहते है, लेकिन इस सीट से उनके ही भाई डॉ. सीतासरन शर्मा विधायक हैं। सीतासरन शर्मा पांच बार के विधायक हैं।  गिरिजा शंकर शर्मा का कांग्रेस में आने को लेकर अटकले चल रही है।  
कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल हुए प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री महेंद्र बौद्ध ने तीन दिन पहले ही बसपा से इस्तीफा दिया है। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही बौद्ध ने  बसपा छोड़ दी है। उनके कांग्रेस में शामिल होने की भी कयास लगाए जा रहे हैं। बौद्ध कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार में शिक्षा मंत्री और गृहमंत्री रह चुके हैं। पिछले चुनाव में टिकट नहीं मिलने से बीएसपी में जाने के बाद उन्हें कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया था। वे भांडेर सीट से दावेदारी कर रहे हैं।

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