पर्युषण पर्व में भगवान महावीर जन्मवाचन शनिवार, 16 को

पर्युषण पर्व में भगवान महावीर जन्मवाचन शनिवार, 16 को

कल्पसूत्र के श्रवण से पूर्व कर्मो का क्षय एवं मोक्ष पद की प्राप्ति संभवः अभिषेक चंद्रावत

ग्वालियर 27 अगस्त। पर्युषण पर्व के चौथे दिन शुक्रवार को सराफा बाजार स्थित जैन श्वेताम्बर मंदिर एवं उपाश्रय भवन में भक्तों का तांता लगा रहा। सुबह प्रवचन और शाम को भजनों की रसधारा बह रही है। श्री वर्घमान जैन स्वाध्याय मंडल जावरा से श्री अमित पारख, अभिषेक चन्द्रावत एवं सौरभ काठेड़ ने कल्प सूत्र का वाचन करते हुये-जो मनुष्य जिनशासन की प्रभावना करता हुआ, सत्कार पूजा करता हुआ, एकाग्र चित्त होकर 3बार, 7बार अथवा 21 बार नवकार मंत्र का जाप करता है, वह भव्यात्मा शीघ्र ही संसार समुद्र से तिर जाता है, अर्थात अनंत दुःखों से छूटकर मोक्ष पद को प्राप्त कर लेता है।
पर्यूषण पर्व तीसरे वैध की दवा के समान-उसे उन्होंने कथा के माध्यम से सुनाया-किसी नगर में एक राजा राज्य करता था, उसका एक मात्र पुत्र था, उस राजा ने यह सोचकर कि मेरा पुत्र सदा हष्ट-पुष्ट कान्तिवाला बना रहे और कभी उसे रोग की उत्पत्ति न हो-वैधों को बुलवाया, उन्हें उत्तम औषधि प्रदान करने का निवेदन किया :- पहला वैध बोला-राजन मेरी औषधि में यह गुण है कि शरीर में यदि रोग हो तो नाश कर दें और न हो तो नवीन उत्पन्न कर दे। राजा ने उस वैध को नकार दिया कहा-यह तो सोते सिंह को जगाने समान है। दूसरा वैध बोला-मेरी दवाई की ऐसी तासीर है अगर बीमारी हो तो नष्ट कर दे और न हो तो निरोगता में भी फायदा न करें। राजा ने इसे भी नकार दिया, कहा यह तो राख में घी डालने जैसा है। तीसरा वैध बोला-मेरी दवाई में एैसा चमत्कार है यदि रोग हो तो नष्ट कर दे और न हो तो हष्ट-पुष्ट और आरोग्य की वृद्धि कर दे, राजा यह सुनकर प्रसन्न हुआ। उसी प्रकार कल्पसूत्र जी को सुनने से सकर्मी जीव अपने पूर्व कर्मो का नाश करते है एवं हलुकर्मी जीव (जिनके कम कर्म है) वो क्षीण हो जाते हैं और शीध्र ही मोक्ष पद को प्राप्त करते हैं।
इसके बाद अभिषेक चंद्रावत ने भगवान महावीर के 27 भवों का वर्णन किया। नयसार के भव में-उन्होंने सम्यक दर्शन की प्राप्ति की, अतिथि सत्कार की भावना से। सत्ताइसवें भव में भगवान जब माता की कुक्षी में पधारे तब इन्द्र महाराजा का आसन डोलायमान होता है, व सात-आठ पांव आगे चलकर स्वयं परमात्मा को नमोत्थुणं सूत्र द्वारा वंदन करते हैं। उस सूत्र के माध्यम से परमात्मा को विशिष्ट उपमाएं देते है, जैसे परमात्मा-पुरूषों में उत्तम, पुरूषों में सिंह के समान, श्रेष्ठ पुण्डरिक कमल की तरह, गंधहस्ति के तुल्य है। लोक में उत्तम, लोक के नाथ, लोक का हित करने वाले है।
पयूर्षण पर्व के पॉंचवे दिन के कार्यक्रमः श्रीसंघ के अध्यक्ष सुनील दफ्तरी, कपूरचंद कोठारी, सुशील श्रीमाल, मनोज पारख, दीपक जैन, राहुल कोठारी एवं संजीव पारख ने बताया कि शनिवार, 16 सितम्बर को प्रातः 9ः00 बजे कल्पसूत्र जी का वाचन एवं दोपहर 2 बजे से उपाश्रय भवन में श्री 1008 भगवान महावीर स्वामी जन्मवाचन श्री वर्घमान जैन स्वाध्याय मंडल जावरा से श्री अमित पारख, अभिषेक चन्द्रावत एवं सौरभ काठेड़ द्वारा किया जायेगा। रात्रि 8 बजे से वैराग्यपुरा, सराफा बाजार स्थित जैन श्वेताम्बर मंदिर में भक्ति संगीत का कार्यक्रम होगा। भगवान महावीर के जन्मोत्सव के कारण मंदिर को अति आकर्षक ढंग से सजाया जायेगा। विद्युत एवं फूलों की सजावट की जायेगी। भगवान महावीर को पालने में बिठाकर झुलाया जायेगा।

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