‘राजस्थान मिशन 2030’ विजन दस्तावेज तैयार करने हेतु शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक— वृहद लक्ष्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है विजन डॉक्यूमेंट

'राजस्थान मिशन 2030' विजन दस्तावेज तैयार करने हेतु शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक— वृहद लक्ष्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है विजन डॉक्यूमेंट

जयपुर, 12 सितम्बर। ‘राजस्थान मिशन 2030’ अभियान के तहत विजन दस्तावेज तैयार करने हेतु मंगलवार को स्कूल शिक्षा शासन सचिव श्री नवीन जैन की अध्यक्षता में राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद में राज्य स्तरीय हितधारकों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में शिक्षा विभाग के सभी 9 ग्रुप्स के द्वारा राजस्थान मिशन 2030 के तहत तैयार किये जा रहे विजन डॉक्यूमेंट का प्रस्तुतीकरण दिया गया।
समीक्षा बैठक में श्री जैन ने बताया कि राजस्थान मिशन 2030 का विजन डॉक्यमेंट तैयार करते समय शिक्षा विभाग द्वारा देश ही नहीं बल्कि वैश्विक परिदृश्य के समकक्ष राजस्थान की वर्तमान स्थिति का आंकलन करते हुए वर्ष 2030 के लिए विजन प्रतिबद्धता एवं लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं। इस विजन डॉक्यूमेंट में राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यक्रमों, योजनाओं एवं गतिविधियों से आये परिवर्तनों को समाहित करते हुए भविष्य की चुनौतियों पर विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत की जा रही है। शिक्षा विभाग 2030 के व्यापक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए नई योजनाओं, नवाचारों एवं रणनीतियों पर कार्य कर रहा है।
इस अवसर पर श्री नवीन जैन द्वारा समस्त हितधारकों को वर्तमान परिस्थितियों एवं भविष्य के व्यापक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने हेतु निर्देशित किया गया। उन्होंने कहा कि 2030 में विद्यालयों को हम पोषण एवं स्वास्थ्य के चेतना केन्द्र के रूप में विकसित कर सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पूर्व प्राथमिक कक्षाओं वाले 03 से 06 आयु वर्ग के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर न्यून पोषण, मध्यम पोषण की आवश्यकताओं के अनुसार कार्य योजना बनाई जाये।
श्री जैन ने अपना विजन शेयर करते हुए कहा कि 2030 तक राजस्थान के प्रत्येक जिले में एज्यूकेशन एवं मैनेजमेंट हब स्थापित किये जाने हेतु विजन तैयार किया जायेे ताकि विभाग के सभी कार्यालय एक ही परिसर में बेहत्तरीन समन्वय के साथ संचालित हो सके। विद्यालयों को स्मार्ट केम्पस के रूप में सभी सुविधाओं वाले खेल मैदान के साथ विकसित किया जा सकता है। प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर के विद्यालय में पूर्व प्राथमिक यूनिट का निर्माण किया जा सकता है। साथ ही वर्ष 2030 तक 70 प्रतिशत विद्यालय सौलर अथवा विंड एनर्जी से लैस होने चाहिए।
प्रजेन्टेशन के दौरान साक्षरता एवं सतत शिक्षा विभाग ने अपने विजन डॉक्यूूमेंट में वर्ष 2030 तक प्रथमतया किसी को भी असाक्षर नहीं रहने देने एवं असाक्षरों को अधिसंख्य साक्षर जनसंख्या की मदद से साक्षर बनाये जाने का विजन प्रस्तुत किया। इस हेतु बीएड, डीएलएड प्रशिक्षणार्थियों व कम्यूनिटी लर्निंग द्वारा अशिक्षित लोगों को शिक्षित कर 2030 तक पूर्णतया साक्षर राजस्थान का लक्ष्य हासिल किये जाने का विजन रखा गया है।
बैठक में यह भी चर्चा की गई कि नेशनल हैल्थ मिशन, राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम इत्यादि विभागों से समन्वय स्थापित करते हुए समग्र स्वास्थ्य की सुविधाओं के लिए विजन रखना होगा।
राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला ने बताया कि बीएड के पाठ्यक्रम में वृहद स्तर पर परिवर्तन की आवश्यकता है। शिक्षा में तकनीक के बढ़ते प्रभाव के परिप्रेक्ष्य में बीएड के पाठ्यक्रम मंे डिजिटल एज्यूकेशन को शामिल करते हुए नवीन क्षेत्रों को समाहित किया जाना आवश्यक है। स्कूली बच्चों हेतु पाठ्यक्रम इस प्रकार तैयार किये जाये कि वे हैप्पीनेस इंडेक्स को बढ़ाएं।
बैठक में निदेशक, माध्यमिक शिक्षा श्री कानाराम द्वारा निदेशालय तथा शिक्षा विभाग के संभाग, जिला व ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की भूमिका एवं उत्तरदायित्व तय करने हेतु विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में विशिष्ट शासन सचिव श्रीमती चित्रा गुप्ता, संयुक्त शासन सचिव, श्री किशोर कुमार, अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक श्री अनिल कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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